बहरैन में शाही सरकार सात साल से जनान्दोलन कुचलने की कोशिश कर रही है लेकिन यह आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच आले ख़लीफ़ा सरकार ने आंदोलनकारियों के ख़िलाफ़ भयानक अपराध किए हैं।
वरिष्ठ धर्मगुरू जिन्हें जनता में बड़ा सम्मान प्राप्त है और आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से जारी रखने में जिनकी प्रभावी भूमिका है उन्हें शाही सरकार ने वृद्धावस्था के बावजूद कई महीने से क़ैद कर रखा है और अब एक बार फिर सूचना मिली है कि उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया है। हालत यह हो गई है कि नज़रबंदी का जीवन गुज़ार रहे आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम की जान ख़तरे में बताई जाती है। आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम वह हस्ती हैं जिन्होंने आंदोलन को शांतपूर्ण रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लेकिन इसके बावजूद शाही सरकार ने मई 2016 में उनके घर के बाहर अपने सुरक्षाकर्मियों को तैनात करके उन्हें नज़रबंद कर दिया। शाही सरकार उनकी नागरिका भी समाप्त कर चुकी है।
77 वर्षीय वरिष्ठ धर्मगुरू को शाही सरकार ने चिकित्सा सेवाओं से वंचित रखा है इस लिए उनकी हालत लगातार ख़राब हो रही है। क़रीबी सूत्रों का कहना है कि आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम का वज़्न आधे से भी कम बचा है लेकिन आले ख़लीफ़ सरकार फिर भी उन्हें नज़रबंदी किए हुए है।
शाही सरकार जनान्दोलन को कुचलने के प्रयास में ग़लतियों पर ग़लतियां कर रही है, शैख़ ईसा क़ासिम के साथ सरकार की इस बेरहमी से जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा।
27 नवंबर 2017 - 19:30
समाचार कोड: 869494
बहरैन में शाही सरकार सात साल से जनान्दोलन कुचलने की कोशिश कर रही है लेकिन यह आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच आले ख़लीफ़ा सरकार ने आंदोलनकारियों के ख़िलाफ़ भयानक अपराध किए हैं।